बंगाल में मतुआ समुदाय को लेकर राजनीति तेज, तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर

- in राजनीति

पश्चिम बंगाल में इसी साल अप्रैल मई के दौरान विधानसभा चुनाव होंगे. इस चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर की संभावना है. हालांकि इस बार कांग्रेस और लेफ्ट की पार्टियां में पूरी जोर आजमाइश में लगी हैं. सभी दल तमाम रैलियों में एक दूसरे पर जमकर हमला बोल रहे हैं. बीजेपी हमेशा कहती रही है कि अगर राज्य में इस बार बीजेपी की सरकार बनती है तो सीएए-एनआरसी और एनपीआर लागू कर दिया जाएगा. वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बार-बार कहती आई हैं कि मैं राज्य में किसी एक व्यक्ति की भी नागरिकता पर आंच नहीं आने दूंगी. इस बीच चुनाव में अब मतुआ समुदाय को लेकर राजनीति तेज हो गई है. जानिए कौन हैं ये लोग और सीएम ममता ने क्या कहा है?

कौन हैं मतुआ समुदाय से संबंध रखने वाले लोग

बताया जाता है कि पूर्वी पाकिस्तान से संबंध रखने वाले मतुआ समुदाय के लोग बांग्लादेश के गठन के बाद पश्चिम बंगाल के हिस्सों में आ गए थे. इनमें से कई ने भारत की नागरिकता प्राप्त कर ली है, जबकि काफी संख्या में इस समुदाय के लोगों के पास नागरिकता नहीं है. इन लोगों की नागरिकता को लेकर ही ममता सरकार ने बीजेपी पर हमला किया है. क्योंकि बीजेपी हमेशा से कहती आई है कि सीएए-एनआरसी लागू होने के बाद ऐसे लोगों को देश छोड़ना होगा.

ममता बनर्जी ने क्या कहा?

सीएम ममता ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर एक रैली में विरोध जताया और नदिया जिले की मतुआ आबादी का हवाला देते हुए कहा कि सभी शरणार्थियों को भूमि का अधिकार दिया जाएगा और कोई उन्हें देश से बाहर नहीं कर सकता. नदिया जिले में इस समुदाय की आबादी करीब 40 फीसदी है.

सीएए पर निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने कहा, ‘ राज्य की सभी शरणार्थी कालोनियों को पश्चिम बंगाल सरकार ने नियमित कर दिया है. प्रत्येक शरणार्थी परिवार को भूमि अधिकार प्रदान किया गया है. हमने इस संबंध में प्रक्रिया शुरू की है और कई परिवार इसका लाभ उठा चुके हैं.’

Loading...

आपको कोई यहां से नहीं हटा सकता– मतुआ समुदाय से ममता

मतुआ समुदाय को लेकर उन्होंने कहा, ‘’आपको कोई यहां से नहीं हटा सकता. आप यहां पैदा हुए हैं और इस देश के नागरिक हैं. आपको अपनी नागरिकता साबित करने के लिए बीजेपी के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है. मैं आश्वस्त करना चाहती हूं कि आपको सीएए, एनआरसी और एनपीआर से डरने की जरूरत नहीं है.’’

चुनाव में मतुआ समाज का समीकरण समझें

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य के नदिया और उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिले की 70 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर मतुआ समुदाय की पकड़ मानी जाती है. गौरतलब है कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को इस समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में वोट दी थीं. इसलिए 24 परगना में इस समुदाय को लुभाने के लिए बीजेपी और टीएमसी की जो आजमाइश जारी है. नदिया में विधानसभा की 17 और उत्तर और दक्षिण 24 परगना में 64 सीटें हैं.

Loading...