आखिरी बार सफाई दे रहा हूं, 2020 रेफरेंडम का समर्थन नहीं किया: खैहरा

आप विधायक व पंजाब विधानसभा में नेता विपक्ष सुखपाल सिंह खैहरा ने एक बार फिर ‘2020 सिख रेफरेंडम’ का समर्थन करने के मामले मे सफाई दी है। खैहरा ने कहा कि उन्होंने कभी ‘2020 सिख रेफरेंडम’ का समर्थन नहीं किया है। उनके जिस बयान पर पंजाब भर की तमाम राजनीतिक पार्टियों ने विवाद खड़ा किया है, असल में उन्होंने दिया ही नहीं है। इस मामले पर अाखिरी बार सफाई दे रहा हूं।

खैहरा ने कहा, ‘मीडिया ने मुझे मिस रिपोर्ट किया है। इस मामले पर मैं शायद आखिरी बार ही सफाई दे रहा हूं। क्योंकि जो बयान मैंने दिया ही नहीं, तो बार-बार सफाई क्यों दें।’ खैहरा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें इस बात का भी अफसोस है कि उनकी अपनी पार्टी के नेता कांग्रेस समेत अकाली-भाजपा के ट्रैप में फंस गए हैं। पार्टी के सह अध्यक्ष डॉ. बलबीर सिंह को भी इस बात की गहराई तक जाना चाहिए था और पूछना चाहिए था कि क्या ऐसा बयान जारी किया भी गया है या नहीं।

बोले-पार्टी के सह अध्यक्ष डॉ. बलबीर सिंह को बयान देने से पहले मामले की गहराई तक जाना चाहिए था

खैहरा कहा कि अमृतसर से लेकर आनंदपुर साहिब प्रस्ताव, संविधान की प्रतियां जलाने तक और संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव बुतरस घाली को सिखों संबंधी प्रस्ताव देने तक प्रकाश सिंह बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह शामिल रहे हैं, लेकिन उन्हें कभी देशद्रोही नहीं बताया गया। अलग पंजाबी सूबे की मांग में कैप्टन अमरिंदर सिंह शामिल रहे और ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान फौजी अफसरों एवं सैनिकों को अमृतसर की तरफ कूच करने का बयान देकर प्रकाश सिंह बादल चुपचाप अपने रेस्ट हाउस में बैठ गए, जबकि सिख धर्मी फौजी अभी जेलों में सड़ रहे हैं।

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खतरनाक आतंकी को वापस लाए थे बादल

खैहरा ने कहा कि भाजपा, आरएसएस सहित अन्य संगठन लगातार हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, लेकिन उन्हें कभी देशद्रोही नहीं बताया जाता। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल खतरनाक आतंकवादी वस्सन सिंह जफरवाल को वापस ले आए और ऐसे ही एक अन्य दुर्दांत आतंकी गुरजंट सिंह के भोग में भी शामिल हुए। लेकिन, उन्हें कभी देशद्रोही नहीं बताया गया।

खैहरा ने कहा कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने तो तमाम हदें पार कर दी हैं। ‘2020 सिख रेफरेंडम’ संबंधी बयान उनके खिलाफ उसी तरह प्रचारित किया गया, जैसे ड्रग्स मामले में किया गया था। उन्होंने कहा, ‘मैं पांच बार चुनाव लड़ चुका हूं। एफिडेविट देकर देश की अखंडता एवं एकता और संविधान में विश्वास प्रकट कर चुका हूं। ऐसे में मुझे देश की अखंडता विरोधी नहीं कहा जा सकता।’

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