मां बनने के बाद हो सकती हैं इस बड़ी समस्या का शिकार, जरुरी है इन बातों को जानना

अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के एक अध्ययन के अनुसार, बच्चे पैदा होने के बाद अवसाद (प्रसवोत्तर अवसाद नई माताओं में तीन साल तक रह सकता है. हर चार में से के एक महिला प्रसव के बाद तनाव का शिकार हो जाती हैं. प्रसवोत्तर अवसाद नई माताओं में एक बहुत ही वास्तविक और सामान्य स्थिति है. भारत में इस स्थिति को सबसे खतरनाक बताया गया है. बावजूद इसके कई माताएं इसे नजरअंदाज करती है.

महिलाओं में जांचा गया अवसाद का स्तर-

शोध में पांच हजार महिलाएं शामिल की गईं. शोध के दौरान उन्होंने तीन साल की अवधि में अवसाद के ‘निम्न-स्तर’ का अनुभव किया. यह शोध यूनिस केनेडी श्राइवर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य और मानव विकास संस्थान में किया गया. बाल रोग पत्रिका में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक, अमेरिका की बाल रोग अकेडमी ने नई माताओं को स्क्रीनिंग के लिए बुलाया जिनमें प्रसवोत्तर अवसाद के बाद एक, दो, चार और छह महीने की अवधि तक उनमें तनाव की स्थिति का पता लगाया गया.

महिलाओं की स्क्रीनिंग होना जरूरी-

शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रसवोत्तर अवसादग्रस्तता के लक्षणों के चार प्रमुख कारण हैं. साथ ही इसमें जोखिम भी बना रहता है जिससे लक्षणों की संभावना और बढ़ जाती है. लेखकों का सुझाव है कि जन्म के दो साल बाद तक सुरक्षा के लिहाज से इन महिलाओं की स्क्रीनिंग होनी जरूरी है. पीएचडी, प्राइमरी लेखक और एनआईसीएचडी महामारी विज्ञान शाखा की एक वैज्ञानिक डायने पुतनिक ने कहा कि ‘हमारे अध्ययन से पता चलता है कि अवसाद के लक्षणों को मापने के लिए छह महीने का समय पर्याप्त नहीं हो सकता.’ उन्होंने सिफारिश की कि मां के मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने और समझने के लिए दीर्घकालिक डेटा महत्वपूर्ण होगा. चूंकि मां का मानसिक स्वास्थ्य उसके स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके बच्चे के लिए भी महत्वपूर्ण है.

महिलाएं दिखीं अतिसंवेदनशील-

बता दें कि अपस्टैट किड्स अध्ययन इस अध्ययन का आधार था जहां 2008 और 2010 के बीच न्यूयॉर्क राज्य में 57 प्रांतों में पैदा हुए बच्चों को शामिल किया गया था.
नए अध्ययन में प्रसव के बाद तीन साल तक पांच हजार महिलाओं पर नजर बनाए रखी गई. लेकिन, महिलाओं में अवसाद का कोई नैदानिक उपचार नहीं किया गया था. शोध के दौरान उन्होंने पाया कि कुछ महिलाओं में पहले से मौजूद मूड स्विंग्स और प्रेंगेंसी के दौरान डायबिटीज के कारण अधिक समय तक अध्ययन में अवसाद के लक्षणों के उच्च स्तर को दिखाने के लिए अतिसंवेदनशील थी.

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