सरकार ने पेटेंट के नियमों में किया बड़ा परिवर्तन, जाने कारोबारियों को क्या है फायदा ?

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने व्यापार को आसान और बेहतर बनाने के लिए पेटेंट के नियमों में बदलाव किया है. इन बदलाव के बाद अब आवेदक को कई पेटेंट के लिए एक ही फॉर्म भरने की आवश्यकता होगी. वहीं पेटेंट के कई आवेदकों के लिए एक संयुक्त फॉर्म भी पेश किया गया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार यह नियम 19 अक्टूबर 2020 से लागू हो गया है. इसके तहत फॉर्म 27 की जरूरत से संबंधित प्रक्रिया को सुगम किया गया है. इस बदलाव में दस्तावेज़ों के इन बदलाव को जमा कराने से संबंधित प्रक्रिया को भी सुगम किया गया है.

आपको बता दें दिल्ली उच्च न्यायालय में पेटेंट संबंधी मामलों के लिए एक याचिका दाखिल की गई थी. जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 अप्रैल 2018 को एक आदेश जारी करके भारत में व्यावसायिक पैमाने पर पेटेंट के लिए प्रयुक्त होने वाले फॉर्म 27 को सुगम बनाने के लिए परामर्श मांगा था. जिसके आधार पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने इसमें बदलाव किए हैं.फॉर्म-27 और नियम 131 (2) के संदर्भ में महत्वपूर्ण बदलाव इस प्रकार हैं

पेटेंट प्राप्त व्यक्ति को एक या एक से अधिक संबंधित पेटेंट के संदर्भ में एकल फॉर्म -27 दाखिल करने की रियायत मिलेगी

जहां दो या दो से अधिक व्यक्तियों को पेटेंट दिया गया है, ऐसे व्यक्ति संयुक्त फॉर्म -27 दाखिल कर सकते हैं

पेटेंट प्राप्त व्यक्ति को अनुमानित राजस्व/अर्जित मूल्य के बारे में जानकारी देनी होगी

अधिकृत एजेंट, पेटेंट प्राप्त व्यक्ति की ओर से फॉर्म -27 जमा कर सकेंगे

फॉर्म 27 दाखिल करने के लिए, पेटेंट प्राप्त व्यक्ति को वित्तीय वर्ष की समाप्ति से मौजूदा तीन महीनों की बजाय छह महीने का समय मिलेगा

पेटेंट प्राप्त व्यक्ति को वित्तीय वर्ष के एक हिस्से या अंश के संबंध में फॉर्म 27 दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी

जहां एक ओर पेटेंट प्राप्त व्यक्ति द्वारा जानकारी जमा करने के संबंध में फॉर्म -27 में आवश्यकताओं को कम किया गया है, वहीं इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 146 (1), नियंत्रक को पेटेंट प्राप्त व्यक्ति से ऐसी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देती है, जिसे नियंत्रक उचित समझते हों.

यदि प्राथमिक दस्तावेज डब्‍ल्‍यूआईपीओ की डिजिटल लाइब्रेरी में उपलब्ध हैं, तो आवेदक को भारतीय पेटेंट कार्यालय में इन्हें प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी

आवेदक को प्राथमिक दस्तावेज़ का सत्यापित अंग्रेजी अनुवाद प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी, जहां प्राथमिकता-दावे की वैधता इस बात के निर्धारण के लिए प्रासंगिक है कि संबंधित आविष्कार पेटेंट योग्य है या नहीं.

ये बदलाव भारत में व्यावसायिक पैमाने पर पेटेंट किए गए आविष्कार के कार्य (फॉर्म 27) के बारे में विवरण प्रस्तुत करने और प्राथमिक दस्तावेजों के सत्यापित अंग्रेजी अनुवाद प्रस्तुत करने से संबंधित आवश्यकताओं को सुव्यवस्थित करेंगे व सरल बनाएंगे.

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