अब शहरों के बाद ग्रामों में चौपाल के माध्यम से BJP को और मजबूत करने का प्रयास जारी

लखनऊ। आने वाले लोकसभा चुनाव में पिछले परिणाम को दोहराने के लिए भाजपा पूरी ताकत से जुट गई है। सहयोगी दलों से संबंधों को बेहतर बनाने के साथ ही भाजपा गांव स्तर पर समीकरण मजबूत कर रही है। ग्राम चौपाल इसकी सबसे मजबूत कड़ी है। ग्राम स्वराज के बाद अब ग्राम चौपाल अभियान में भी भाजपा सरकार और संगठन के पदाधिकारी सक्रिय हो गए हैं। भाजपा ने एक जून से ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम चौपाल का आयोजन शुरू किया है। यह सिलसिला निरंतर गति पकड़ रहा है। इसको प्रभावी बनाने के लिए क्षेत्र स्तर पर भी बैठकें हो रही हैं।

कमजोर जनाधार वाले गांव चिह्नित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने इसकी शुरुआत की। काशी, अवध और गोरखपुर समेत कई क्षेत्रों की बैठक संपन्न हो चुकी है। प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ल ब्रज क्षेत्र की बैठक के लिए एटा पहुंचे हैं। क्षेत्रीय बैठकों में सभी समीकरणों पर जोर दिया जा रहा है। ग्राम चौपाल अभियान में सबसे कमजोर क्षेत्रों में भाजपा सक्रिय है। जिन गांवों में भाजपा का मजबूत जनाधार नहीं है, उन्हें चिह्नित कर भाजपा के शीर्ष नेता वहां पहुंच रहे हैं।

खासतौर से जातीय दृष्टिकोण से माहौल बनाने की पहल हो रही है। मसलन उस गांव की सर्वाधिक आबादी वाली बिरादरी के प्रमुख नेता को भी ग्राम चौपाल में विशेष रूप से आमंत्रित किया जा रहा है। भाजपा ने यह रणनीति 2019 के चुनाव में बूथ के हर घर में भाजपा का वोट बनाने के लिए तैयार की है। भाजपा प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने यह तय निर्देश दिया है कि ग्राम पंचायत में निवास करने वाले विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी एवं पात्र व्यक्ति, भाजपा बूथ समिति और समर्थकों को चौपाल में जरूर आमंत्रित किया जाए। 

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पहले मैनपुरी और उन्नाव 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चार जिलों में ग्राम चौपाल अभियान के जरिये भाजपा को मजबूती देंगे। वह गुरुवार को मैनपुरी और उन्नाव तथा शुक्रवार को सीतापुर और लखीमपुर खीरी में ग्राम चौपाल में शामिल होंगे। ग्राम स्वराज अभियान में प्रतापगढ़ जिले में रात्रि प्रवास कर योगी ने जमीनी हकीकत जानी थी।

अब वह इन चौपालों के जरिये गांवों तक पहुंच विकास और समस्याओं की नब्ज पकड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि भाजपा ने ग्राम चौपाल के लिए राज्य सरकार के मंत्रियों, सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष, राष्ट्रीय पदाधिकारी, राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य, प्रदेश पदाधिकारी, क्षेत्रीय पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष और जिला महामंत्री का प्रवास तय किया है। हर प्रवासी के लिए चार ग्राम पंचायतों में जाना अनिवार्य किया गया है। 

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