पिछड़ों को आरक्षण देने की दिशा में योगी सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अति पिछड़ों को आरक्षण देने की मंशा के तहत सरकार ने कदम आगे बढ़ाने शुरू कर दिए हैैं। इसकी पहली कड़ी में चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। हालांकि इस समिति के गठन का कारण हाईकोर्ट के निर्देशों का अनुपालन बताया गया है लेकिन उसकी रिपोर्ट आगे चलकर अति पिछड़ों को आरक्षण का मजबूत आधार भी बन सकती है। समिति के विचारार्थ जो विषय निर्धारित किए गए हैैं, उनमें पिछड़ों को मिले आरक्षण का विश्लेषण भी है।

शासन की ओर से गठित समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश राघवेंद्र कुमार बनाए गए हैैं। अन्य सदस्यों में रिटायर्ड आइएएस जेपी विश्वकर्मा, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह और अधिवक्ता अशोक राजभर समित के सदस्यों में शामिल हैैं। प्रमुख सचिव महेश कुमार गुप्ता की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार समिति पिछड़े वर्ग के कल्याण के लिए प्रदेश सरकार की सभी योजनाओं, व्यवस्थाओं और सुविधाओं का विश्लेषण करने के साथ ही पिछड़ा वर्ग का सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक आकलन भी करेगी।

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आरक्षण व्यवस्था के अधीन शैक्षणिक क्षेत्र में पिछड़े वर्ग की विभिन्न जातियों की भागीदारी का आकलन किया जाएगा। प्रमुख सचिव ने बताया कि सरकारी सेवाओं में पिछड़े वर्ग को आरक्षण और उनकी भागीदारी पर भी समिति रिपोर्ट तैयार करेगी। समिति इस बात की भी संस्तुति करेगी कि पिछड़ा वर्ग की आरक्षण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए क्या किया जा सकता है।

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