
पूर्णिया सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी के मामले में जांच का दायरा देश से बाहर तक पहुंच गया है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि धमकी भरा ई-मेल वीपीएन के जरिए भेजा गया था, जिससे भेजने वाले की असली पहचान और जगह छिप गई।
पूर्णिया सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी वाले मामले में अब जांच देश से बाहर तक पहुँच गई है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि धमकी भरा ई-मेल भेजने के लिए वीपीएन का इस्तेमाल किया गया था। हैरानी की बात यह है कि इस ई-मेल का पहला पता जर्मनी दिख रहा है, जिससे पूरा मामला और उलझ गया है।
तकनीकी जानकारों के मुताबिक, भेजने वाले ने अपनी पहचान और असली जगह छिपाने के लिए एक खास वीपीएन ऐप का सहारा लिया। वीपीएन असली आईपी पता छिपा देता है और इंटरनेट का रास्ता बदल देता है। इसी वजह से मेल भेजने वाले की जगह और पता बार-बार बदलता रहता है और उसे पकड़ना मुश्किल हो जाता है। अभी तक की जांच में सर्वर की जगह जर्मनी ही दिखाई दे रही है। यह धमकी भरा ई-मेल आउटलुक के जरिए भेजा गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए माइक्रोसॉफ्ट कंपनी से संपर्क किया गया है और उस ई-मेल आईडी से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी गई है। खजांची हाट थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस की साइबर टीम दिन-रात काम कर रही है।
उच्च अफसर खुद रख रहे नजर
इस मामले की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि पूर्णिया परिक्षेत्र के आईजी विवेकानंद और पुलिस अधीक्षक स्वीटी सेहरावत खुद जांच पर नजर रख रहे हैं। पुलिस हर पहलू से मामले की पड़ताल कर रही है, ताकि धमकी देने वाले तक पहुँचा जा सके।
पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी धमकियां
गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले भी पटना, किशनगंज और अररिया की अदालतों को ऐसी धमकियां मिल चुकी हैं। लेकिन हर बार वीपीएन के इस्तेमाल की वजह से पुलिस किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है। पुलिस का कहना है कि इस बार तकनीकी जांच को और तेज किया गया है और उम्मीद है कि जल्द ही धमकी देने वाले का पता लगा लिया जाएगा।